हमारे घर के मुखिया हैं मेरे पापा।
हमारे खुशियों की चाबी हैं मेरे पापा।।
हमें अपने उँगली थाम चलना सिखाया।
कोशिश को सफलता में बदलना सिखाया।।
बच्चों के लिए पिता से बड़ा कोई सितारा नहीं।
तकलीफ में उनसे बड़ा कोई सहारा नहीं।।
उनको आदर्शों को हमने जीने का आधार बनाया।
उनके कहे हर बात को हमने जीने का सुविचार बनाया।।
रब तू उनको पीर ना देना।
मेरे साथ होने का धीर देना।।
हम बच्चों को खूब दिया हैं।
हर एक स्वप्न को पूरा किया हैं।।
खून पसीना एक कर के फसल की तरह सींचा हैं हमको।
दिन रात एक कर के बहुत नाजों से पाला हैं हमको।।
कभी ना जताई कोई अपनी इच्छा।
बस किये हमेशा हमारी सुरक्षा।।
हमें कुछ भी कम ना पड़ जाए।
इसलिये वो ज्यादा श्रम कर कमाए।।
रब तू उनको खुश रखना।
बिल्कुल ही तंदरूस्त रखना।।
अब कोई संकट उन पर आने ना दूंगा।
उनके ऊपर ढाल बन कर हमेशा मैं रहूँगा।।
हर दिल-ए-ख्वाहिश उनकी पूरी करूँगा।
अपनी ज़िंदगी उनकी मान कर जियूँगा।।